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गरुड़ पुराण (Garuda Purana): किस चीज से क्या नष्ट हो जाता है?

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जो लोग धन और सभी सुख-सुविधाओं से संपन्न हैं, फिर भी गंदे कपड़े पहनते हैं तो उनका सौभाग्य नष्ट हो जाता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि ऐसे लोगों को महालक्ष्मी त्याग देती हैं और समाज में भी सम्मान प्राप्त नहीं होता है। साफ एवं सुगंधित वस्त्र धारण करने पर लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।
यदि हम विद्या का निरंतर अभ्यास नहीं करेंगे तो उस ज्ञान को भूल सकते हैं। अत: हम जो भी चीजें सीखते हैं, उनका लगातार अभ्यास करते रहना चाहिए।
अधिकांश बीमारियां असंतुलित खान-पान की वजह से ही होती हैं। हमें सदैव सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। ऐसे भोजन से पाचन तंत्र ठीक से काम करता है और भोजन से पूर्ण ऊर्जा शरीर को प्राप्त होती है। पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और इस वजह से हम रोगों से बचे रहते हैं।
शत्रुओं से निपटने के लिए चतुरता पूर्ण नीति का सहारा लेना चाहिए। शत्रु लगातार हमें नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते रहते हैं और यदि हमें चतुरता नहीं दिखाएंगे तो हानि हमारी ही होती है। अत: जैसा शत्रु है, उसके अनुसार नीति का उपयोग करके उसे नष्ट किया जा सकता है।

शास्त्रानुसार यदि आपकी पत्नी में है ये गुण, तो आप है भाग्यशाली

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गृह कार्य यानी घर के काम, जो पत्नी घर के सभी कार्य जैसे- भोजन बनाना, साफ-सफाई करना, घर को सजाना, कपड़े-बर्तन आदि साफ करना, बच्चों की जिम्मेदारी ठीक से निभाना, घर आए अतिथियों का मान-सम्मान करना, कम संसाधनों में ही गृहस्थी चलाना आदि कार्यों में निपुण होती है, उसे ही गृह कार्य में दक्ष माना जाता है। ये गुण जिस पत्नी में होते हैं, वह अपने पति की प्रिय होती है।

पत्नी को अपने पति से सदैव संयमित भाषा में ही बात करना चाहिए। संयमित भाषा यानी धीरे-धीरे व प्रेमपूर्वक। पत्नी द्वारा इस प्रकार से बात करने पर पति भी उसकी बात को ध्यान से सुनता है व उसके इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करता है। पति के अलावा पत्नी को घर के अन्य सदस्यों जैसे- सास-ससुर, देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी, ननद आदि से भी प्रेमपूर्वक ही बात करनी चाहिए। बोलने के सही तरीके से ही पत्नी अपने पति व परिवार के अन्य सदस्यों के मन में अपने प्रति स्नेह पैदा कर सकती है।

जो पत्नी अपने पति को ही सर्वस्व मानती है तथा सदैव उसी के आदेश का पालन करती है, उसे ही धर्म ग्रंथों में पतिव्रता कहा गया है। पतिव्रता पत्नी सदैव अपने पति की सेवा में लगी रहती है, भूल…

रामचरितमानस – इन नौ लोगों की बात तुरंत मान लेनी चाहिए

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1. शस्त्रधारी- श्रीरामचरित मानस के अनुसार यदि कोई शस्त्रधारी हमें किसी काम को करने के लिए कह रहा है, तो हमारी भलाई इसी में है कि हम उसका काम कर दें, अन्यथा परिणाम भयंकर हो सकते हैं। शस्त्रधारी की बात टालने पर उसे क्रोध आ सकता है और वह हम पर प्रहार भी कर सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए हमें उस समय सभी बातें मान लेनी चाहिए।

2. मर्मी यानी भेद जानने वाला- यदि कोई व्यक्ति हमारे सभी भेद यानी राज जानता है, तो उसकी बात न मानना बहुत ही हानिकारक हो सकता है। भेद जानने वाला व्यक्ति नाराज हो जाए तो वह हमारे राज सभी को बता सकता है। राज की बातें सार्वजनिक होने पर कई प्रकार के विपरीत परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

3. मालिक या बॉस- आज के दौर में एक वाक्य बहुत चर्चित है ‘बॉस इस ऑलवेज राइट’। ये बात सच भी है। यदि आप बॉस से किसी भी प्रकार का वाद-विवाद करेंगे तो यह आपकी नौकरी के लिए अच्छा नहीं है। बॉस की बात को टालना आपकी नौकरी पर बुरा असर डाल सकता है। इसीलिए मालिक जो भी बात कहे, उसे तुरंत मान लेना चाहिए। कभी-कभी बॉस गलत निर्णय भी ले लेते हैं, लेकिन हमें यह बात वाद-विवाद करके नहीं, बल्कि काम करके सिद्ध करनी…

Shrimad Bhagavad Gita : ध्यान रखें गीता में बताई गई ये बातें, वरना बढ़ता है वजन

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भोजन से ही हमें कार्य करने की शक्ति मिलती है। स्वस्थ शरीर के लिए खाना बहुत जरूरी है, लेकिन कभी भी बहुत कम या बहुत ज्यादा नहीं खाना चाहिए। जो लोग आवश्यकता से अधिक खाते हैं या आवश्यकता से कम खाते हैं, वे लक्ष्य से भटक सकते हैं। शरीर अस्वस्थ हो सकता है, वजन बढ़ सकता है। अस्वस्थ शरीर से किए गए काम में सफलता प्राप्त करना बहुत मुश्किल होता है। ये बात महाभारत युद्ध के समय श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता उपदेश देते हुए कही थी। यह श्रीमद् भगवत गीता के छठे अध्याय का 16वां श्लोक है। इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जो लोग बहुत ज्यादा खाते हैं, वे कभी भी अपने लक्ष्यों तक पहुंच नहीं पाते हैं। इसी प्रकार जो लोग बहुत कम खाते हैं, वे भी कार्यों को पूर्ण नहीं कर पाते हैं और सफलता प्राप्त नहीं कर पाते हैं। \ आवश्यकता से अधिक खाने पर हमारा पाचन तंत्र बिगड़ सकता है। अपच, कब्ज, एसीडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ठीक इसी प्रकार जो लोग बहुत कम खाते हैं, वे भी पेट से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का सामना करते हैं। दोनों ही स्थितियों में हमारा शरीर भोजन से उचित ऊर्जा प्राप्त नहीं कर पाता है। अधिक भोजन …

भागवत पुराण- इसलिए होता है महिलाओं को मासिक धर्म

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असुरों से खुद को बचाते हुए वे सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया कि उन्हें एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए, यदि वह प्रसन्न हो जाए तभी उन्हें उनकी गद्दी वापस प्राप्त होगी। आज्ञानुसार इन्द्र देव एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा में लग गए। लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि उस ज्ञानी की माता एक असुर थी इसलिए उसके मन में असुरों के लिए एक विशेष स्थान था। इन्द्र देव द्वारा अर्पित की गई सारी हवन की सामग्री जो देवताओं को चढ़ाई जाती है, वह ज्ञानी उसे असुरों को चढ़ा रहा था। इससे उनकी सारी सेवा भंग हो रही थी। जब इन्द्र देव को सब पता लगा तो वे बेहद क्रोधित हो गए और उन्होंने उस ब्रह्म-ज्ञानी की हत्या कर डाली। एक गुरु की हत्या करना घोर पाप था, जिस कारण उन पर ब्रह्म-हत्या का पाप आ गाया। ये पाप एक भयानक राक्षस के रूप में इन्द्र का पीछा करने लगा। किसी तरह इन्द्र ने खुद को एक फूल के अंदर छुपाया और एक लाख साल तक भगवान विष्णु की तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्द्र देव को बचा तो लिया लेकिन उनके ऊपर लगे पाप की मुक्ति के लिए एक सुझ…

प्रेरक कहानी- अनोखा पात्र जो कभी नहीं भर सकता

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दिवस के प्रथम याचक की कोई भी इच्छा पूरी करने का उसका नियम था।

उस फकीर ने अपने छोटे से भिक्षापात्र को आगे बढ़ाया और कहा, “बस इसे स्वर्ण मुद्राओं से भर दें।”

सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था।

वह तो जादुई था। जितनी अधिक मुद्राएं उसमें डाली गई, वह उतना ही अधिक खाली होता गया!
सम्राट को दुखी देख वह फकीर बोला, “न भर सकें तो वैसा कह दें। मैं खाली पात्र को ही लेकर चला जाऊंगा! ज्यादा से ज्यादा इतना ही होगा कि लोग कहेंगे कि सम्राट अपना वचन पूरा नहीं कर सके !”

सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, उसके पास जो कुछ भी था, सभी उस पात्र में डाल दिया गया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा, सो न भरा।

तब उस सम्राट ने पूछा,”भिक्षु, तुम्हारा पात्र साधारण नहीं है। उसे भरना मेरी सामर्थ्य से बाहर है। क्या मैं पूछ सकता हूं कि इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है?”

वह फकीर हंसने लगा और बोला, “कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है। क्या आपको ज्ञात नहीं है कि मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता…

नैतिक कहानी | एक वेश्या – एक सन्यासी

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शक तो उन देवदूतों को भी हुआ। उन्होंने कहा, भूल कभी हुई तो नहीं, लेकिन मामला तो साफ दिखता है कि यह वेश्या है और तुम संन्यासी हो। वे गए लेकिन फिर ऊपर से खबर आई कि कोई भूल-चूक नहीं है, जो होना था, वही हुआ है। वेश्या को स्वर्ग में ले आओ, संन्यासी को नरक में डाल दो और अगर ज्यादा ही जिद करे, तो उसे समझा देना कि कारण यह- यह है।

जिद संन्यासी ने की, तो देवदूतों को कारण बताना पड़ा। कारण यह था : कि संन्यासी रहता तो मंदिर में था, लेकिन सोचता सदा वेश्या की था, भगवन की पूजा तो करता था, आरती भी उतारता था। लेकिन मन में प्रतिमा वेश्या की होती थी। और जब वेश्या के घर में रात राग-रंग होता, बाजे बजते, नाच होता, कहकहे उठते, नशे में डूब कर लोग उन्मत्त होते, तो उसको ऐसा लगता था जैसे कि मैंने अपना जीवन व्यर्थ ही गंवाया।

आनंद जब वहां है तो मैं यहां क्या कर रहा हूं, इस निर्जन में बैठा, इस खाली मंदिर में, यह पत्थर की मूर्ति के सामने! पता नहीं, भगवान है भी की नहीं उसे हमेशा यही शक पैदा होता। और रात जाग कर वह करवटें बदलता, और वेश्या को भोगने के सपने देखता और वेश्या की हालत ठीक इसके विपरीत कुछ ऐसी थी कि वह थी तो वे…